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gaurav2911


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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

मै आज का इंडियन एक्सप्रेस पढ़ रहा था। उसमें लिखा था कि भीड़ के पर फायरिंग से चार प्रदर्र्शनकारियों की मौत। अंदर के पेज में उससे संबंधित जो खबर छपा था। उसे वर्र्णित करता हूं, रात के समय बीएसएफ की 75बीं बटालियन रूटीन पेट्रोलिंग पर थी, रास्ते में एक मोहम्मद लतीफ नाम का शख्स मिला, जवानों ने उससे उसका आईडी या कोई पहचान पत्र मांगा। बजाए वो अपनी पहचान बाते से सेना का सवानों से भीड़ने लगा। उन्हे हाथापाई करने पर उतारू हो गया, उसके साथ कुछ भीड़ भी आई, जो कि संभंवत पूर्व नियोजित रही होगी....इसके बाद सेना के जवान अपने कैंप में चले जाते, लेकिन भीड़ उनके पीछे-पीछे उनके कैंप तक जाती, लोग सेना के कैंप में पत्थरबाजी करने लगते है। सेना पुलिस और स्थानीय प्रशासन को सूचित करती जिसके मौके पर पहुची पुलिस उनको तितर-बितर करती है, सुबह 6 बजे दोबारा करीब 700-800 लगो वहां पहुचते है सेना के कैंपर पत्थरबाजी शुरू कर देते है, गोली भी चलाते जिससे बीएसएफ के 9 जवान घायल हो जाते है। उसके बाद आमने सामने की फायरिंग में करीब 4 प्रदर्र्शनकारी मारे जाते है। अलगाववादी नेता उसके बाद बंद बुलाते है। ये स्थिति है जम्मू कश्मीर की। मुख्यमंत्री इसे गंभीर परिणाम सामने आने की बात कहते है। भारत सरकार लोगों के मरने पर दुख जताती। लेकिन कोई नहीं पूछता कि सेना के 9 जवान घायल कैसे हुए जिनमें से कई जवानों को गोली लगी है।  

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प्रिय गौरव जी सादर वंदेमातरम ! दिल्ली में हुये एक सेमिनार में सभी देशद्रोहियों ने हिस्सा लिया और भारत के विखण्डन का नारा लगा कर चलते बने । वह तो भला हो कश्मीरी पण्डितों को जिन्होंने जूते से इन विद्वानों का इस्तकबाल किया । . अरूंधती राय को तो हर देशभक्त भारतीय जान गया पर इधर जागरण जंक्शन पर एक महाशय छद्म नाम ‘कूल बेबी’ से टिप्पणियां कर रहे हैं । अभीकल ही उन्होंने ने मेरे लेख ‘कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है’ पर ऐसी जोरदार टिप्पणी की है कि सैयद अली शाह गिलानी और अरूंधती राय भी क्या खा कर कश्मीर पर ऐसी टिप्पणी करेंगे । इन्होंने सभी देशभक्त भारतीयों को अपनी बहुमूल्य राय दी है कि कश्मीर आप लोगों का मसला नहीं है । आप लोगों के अवलोकनार्थ टिप्पणी नीचे प्रषित कर रहा हूं । अरूंधती राय तो नहीं हां हम सब की आवाज इनके कानों तक तो जरूर पहुंचेगी । . “Kashmeer is not your matter……..It is matter of those who stay in kashmeer.I read here your comments and alike you buddies,But It appears to be double standard in your mind,what have been done by Indira gandhi is right? then you have to accept Mahmood Ghaznavi as a Great Reformer because he united India at time the various kings here fighting for their own throne……” . श्रीमान कूल बेबी जी देशद्रोह का बोर्नवीटा पी पी कर चाहे जितने तगड़े हो जाओ, हम भारतवासी सरदार पटेल की पूजा करते हैं जब तक चुप है चुप हैं, जिस दिन कश्मीर मसला निपटाने निकलेंगे उस दिन दुनिया में आतंकवाद का एक्सपोर्ट करने वाले देश के साथ साथ आपको भी देखेंगे ।

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के द्वारा: abodhbaalak abodhbaalak

बन्धु, युवाओ को क्या सरकार ही सब कुछ देगी ! नहीं ! रही आदर्श और संस्कार की बात तो वह बाजार में नहीं मिलते संस्कार प्रत्येक प्राणी के परिवार से मिलते है ? जहाँ तक युवाओ को संगठित करने की बात है , तो उन्हें कौन संगठित करेगा सब लोग चाहे राजनितिक पार्टियाँ हो चाहे धार्मिक संगठन हो या सामाजिक संगठन हो सब के सब अपने मतलब के लिए युवाओ का शोषण करते हैं ? केवल एक विकल्प है मेरी नजर में की प्रत्येक जवान व्यक्ति बालक / बालिका को चाहे वह विद्यार्थी हो या कामगार सरकारी स्तर पर फौजी ट्रेनिंग अनिवार्य कर दी जय जिस प्रकार से शिक्षा का अधिकार कानून बना है उसी तर्ज पर होना चाहिए / तब आप देखेगे की भारत का भविष्य कैसा होगा .................. उसके लिए एक क्रांति की आव्यशकता वो कौन करेगा .........

के द्वारा:

किसकी है जनवरी, किसका अगस्‍त है? कौन यहां सुखी है, कौन यहां मस्‍त है? सेठ है, शोषक है, नामी गला-काटू है गालियां भी सुनता है, भारी थूक-चाटू है चोर है, डाकू है, झूठा-मक्‍कार है कातिल है, छलिया है, लुच्‍चा-लबार है जैसे भी टिकट मिला, जहां भी टिकट मिला शासन के घोड़े पर वह भी सवार है उसी की जनवरी छब्‍बीस उसीका पन्‍द्रह अगस्‍त है बाकी सब दुखी है, बाकी सब पस्‍त है… कौन है खिला-खिला, बुझा-बुझा कौन है कौन है बुलंद आज, कौन आज मस्‍त है? खिला-खिला सेठ है, श्रमिक है बुझा-बुझा मालिक बुलंद है, कुली-मजूर पस्‍त है सेठ यहां सुखी है, सेठ यहां मस्‍त है उसकी है जनवरी, उसी का अगस्‍त है पटना है, दिल्‍ली है, वहीं सब जुगाड़ है मेला है, ठेला है, भारी भीड़-भाड़ है फ्रिज है, सोफा है, बिजली का झाड़ है फैशन की ओट है, सबकुछ उघाड़ है पब्लिक की पीठ पर बजट का पहाड़ है गिन लो जी, गिन लो, गिन लो जी, गिन लो मास्‍टर की छाती में कै ठो हाड़ है! गिन लो जी, गिन लो, गिन लो जी, गिन लो मज़दूर की छाती में कै ठो हाड़ है! गिन लो जी, गिन लो, गिन लो जी, गिन लो घरनी की छाती में कै ठो हाड़ है! गिन लो जी, गिन लो, गिन लो जी, गिन लो बच्‍चे की छाती में कै ठो हाड़ है! देख लो जी, देख लो, देख लो जी, देख लो पब्लिक की पीठ पर बजट का पहाड़ है! मेला है, ठेला है, भारी भीड़-भाड़ है पटना है, दिल्‍ली है, वहीं सब जुगाड़ है फ्रिज है, सोफा है, बिजली का झाड़ है फैशन की ओट है, सबकुछ उघाड़ है महल आबाद है, झोपड़ी उजाड़ है ग़रीबों की बस्‍ती में उखाड़ है, पछाड़ है धत् तेरी, धत् तेरी, कुच्‍छों नहीं! कुच्‍छों नहीं ताड़ का तिल है, तिल का ताड़ है ताड़ के पत्‍ते हैं, पत्‍तों के पंखे हैं पंखों की ओट है, पंखों की आड़ है कुच्‍छों नहीं, कुच्‍छों नहीं… ताड़ का तिल है, तिल का ताड़ है पब्लिक की पीठ पर बजट का पहाड़ है! किसकी है जनवरी, किसका अगस्‍त है! कौन यहां सुखी है, कौन यहां मस्‍त है! सेठ ही सुखी है, सेठ ही मस्‍त है मंत्री ही सुखी है, मंत्री ही मस्‍त है उसी की है जनवरी, उसी का अगस्‍त है…

के द्वारा: sandeep sandeep

यहाँ पर बात कांग्रेस की है इस लिए शुरुआत इसी दल से करते है ये सच है की आज आम आदमी की महगाई से कमर टूटी हुई है लेकिन महगाई के लिए सिर्फ कांग्रेस को दोसी ठहराना उचित नहीं होगा संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन में शामिल सभी दल इसके लिए जिम्मेवार है और सबसे बड़े खलनायक श्री शरद पवार है जो की आये दिन नहीं अपनी बेतुकी बातो से महगाई बढाने में कोई कसर छोड़ने को राजी नहीं है शकर की सबसे ज्यादा मिले इन महाशय की है या इनके रिश्तेदारो की है इस लिए ये आये दिन शकर के दाम बढाने के लिए प्रयासरत रहते है.दलगत राजनीती में सबकी अपनी मजबूरिया होती है जैसे बी.जे.पी ने सत्ता हासिल करने के बाद भी राम मंदिर के मुद्दे को तिलांजलि दे दी उसी प्रकार कांग्रेस की भी अपनी मजबूरी जरूर होगी महगाई से निपटने का एक और आसान रास्ता है रोज़गार के अधिक से अधिक अवसर पैदा करना प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि करना आदि उद्योगों को सरल निति के साथ लाल्फितासाही से मुक्त रखते हुए बढावा देना भ्रस्टाचार की सजा आरोपी की समस्त चल अचल संपत्ति जब्त कर आरोपी को ९० दिन की समय सीमा में अदालती कार्यवाही समाप्त कर फांसी की सजा देना चाहिए तो भ्रस्टाचार जरूर कम या ख़तम होगा राजनितिक दलों को अधिक बहुमत से संसद में भेजने के बाद ही हमें उन दलों से कुछ अच्छी उम्मीद करना चाहिए .

के द्वारा:

सोहराबुद्दीन को मारकर गुजरात पुलिस ने कोई गलत काम नहीं किया है क्योंकि सोहराबुद्दीन एक आतंकवादी था १९९६ में उसके घर के सामने वाले कुआ से कई एके ५६ निकली जा चुकी है वो एक अपराधी था उसे मारकर नरेन्द्र मोदी की पुलिस ने समाज का भला किया है. क्यों एक अपराधी को मरने की सजा समाज के रक्षक पुलिस के अधिकारी भुगते . ये सिर्फ भारत में ही संभव है की किसी अपराधी को मारा तो उस पुलिस वाले को सजा जरूर मिलेगी लेकिन अपराधी हमारे समाज में कितनी भी गन्दगी फैलाये उन्हें सहानुभूति की नजर से देखा जाता है. में कहता हूँ जब तक वोट की राजनीती और वर्ग विशेष को संतुस्ट करने की निति हमारे राजनितिक दल नहीं छोड़ेगे तब तक न तो नक्सली ख़तम होंगे और ना ही सोहराबुद्दीन जैसे अपराधी कम होंगे.

के द्वारा:

गौरव साहब, इतना बवाल इस लिए है की यह हत्या कथित तौर पर अमित शाह के इशारे पर आला पुलिस अधिकारिओ के द्वारा की गयी थी,, सोहराबुद्दीन एक अपराधी था और पहले अमित शाह के लिए ही वसूली का काम करता था, इनका झगडा वसूली आदि को ही लेकर हुआ था जिसके परिणाम स्वरुप यह घटना हुई, कई समाचार पत्रों में यह विवरण मिल जाये गा ( नव भारत , दैनिक भास्कर आदि ) !! मेरा सवाल सोहराबुद्दीन का नहीं है ,, क्या आप बताएगे की उसकी पत्नी जिसको कई दिनों तक फॉर्म हाउस में रख कर बलात्कार किया गया और जला कर मार दिया गया ,, फिर प्रजापति को भी फर्जी एन्कोउन्टर में मार दिया गया (जो गुजरात सर्कार स्वीकार कर चुकी है ) की हत्याओ को कैसे जायज़ कहेंगे !! क्या एक सभ्य समाज में ऐसे अपराध शोभा देता है ??

के द्वारा:

गौरव जी, आप ही नहीं सारे हिन्दुस्तान के लोग गुजरात जैसे विकास की आशा संजोये बैठे हैं| मोदी जैसा कर्मठ नेता ही है जो अनगिनत चुनौतियों से लड़ता हुआ लगातार भेडिये नेताओं के लिए चुनौती बना हुआ है और हर रोज़ अधिक शशक्त होकर उभरता है| जिस तरह आप अपने मुख्या-मंत्री का समर्थन कर रहे हैं ईस्वर करे ऐसा नेता हर राज्य को मिले तो पूरे भारत की तस्वीर विकासोन्मुख हो जाए| रह गई बात सोहराबुद्दीन की और सरकार व न्यायालय के अचानक एनकाउन्टर के खिलाफ मुहीम चलाने की तो ये चाल एक बार फिर इनके मुह पर कालिख पोतने वाली है आप सत्य के साथ डेट रहिये पूरा राष्ट्र सत्य का साथ देगा| सच्चाई सामने आने दीजिये दूध का दूध और पानी का पानी जरूर होगा|

के द्वारा: chaatak chaatak

सोनिया गाँधी के नेतृत्व में चल रही दिल्ली सरकार आखिर क्यों विदेसियो पर बार बार मेहरबान होती है? पहले बोफोर्स टॉप सौदे में दलाली खाने वाले इटली के क्वात्रोची को बचाने में सारे कांग्रेसी जुटे रहे, अब भोपाल गैस कांड के आरोपी एंडरशन को इस तरह बचाया जा रहा है मानो वह भारत सरकार का मेहमान हो, दलितों व मजदूरो का हितेषी बनने का ड्रामा करने वाले राहुल गाँधी ये बताये की हजारो मजदूर परिवारों को मौत की नींद सुलाने वाले एंडरशन को उनकी सरकार ने देश से जाने क्यों दिया, क्वात्रोची की तरह ही एंडरशन को भी बचाने की तेयारी क्यों हो रही है, यह सरकार राहुल सोनिया के इशारे पर चल रही है, लेकिन विवादित मामले आते ही ये दोनों दुबक जाते है, ताकि जो छवि ख़राब होनी हो वो बेचारे सरदार मनमोहन सिंह की हो और युवराज व महारानी की छवि चुनावो में जनता को दिखने के लिए बची रहे, बाद में मनमोहन सिंह का भी वो ही हाल होना है जो इस गाँधी परिवार और उसके चमचो ने पी वी नर्सिगराव का किया था,सारे दोष सरदार जी के सर पर डाल कर ये माँ बेटा फिर जनता का मानसिक शोषण करने मैदान में आ जायेगे, लेकिन काठ की हांड़ी बार बार नहीं चढ़ती ये इटली की नहीं हिन्दुस्तान की कहावत है, एंडरशन को पकड़ कर लाओ क्वात्रोची पर फिर से मुकदमा चलाओ तभी देश की जनता तुम्हे माफ़ करने पर विचार करेगी

के द्वारा: डॉ दीपक धामा डॉ दीपक धामा




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